कवर्धा। कबीरधाम कलेक्टरेट में आज चल रही समय-सीमा (टीएल) की बैठक महज एक प्रशासनिक औपचारिकता है या जनता के प्रति जवाबदेही का मंच? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि जिले के अन्नदाता इस वक्त खून के आंसू रो रहे हैं, और कमान संभालने वाले अधिकारी अपनी 'वॉयस मेल' वाली दुनिया में मस्त हैं। कवर्धा में लंबा कार्यकाल बिताने के बाद भी कलेक्टर गोपाल वर्मा को उनके ही मातहत अधिकारी लगातार गुमराह कर रहे हैं। गलियारों में साफ चर्चा है कि मुखिया की ढीली कमान के कारण ही कनिष्ठ अधिकारी बेलगाम हो चुके हैं।
कलेक्टर के रडार से बाहर क्यों हैं डीडीए अमित कुमार?
जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही खाद की हाहाकार मची है। लेकिन कृषि विभाग के उप संचालक (डीडीए) अमित कुमार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप हैं कि डीडीए साहब खुद को जिला प्रशासन से भी ऊपर और सर्वशक्तिशाली समझते हैं। जब जिला संकट में है, तब कृषि अधिकारी न तो किसी जनप्रतिनिधि का फोन उठाते हैं और न ही पीड़ित किसानों से मुलाकात करते हैं।
सवाल यह उठता है कि क्या कलेक्टर गोपाल वर्मा को अपने इस सबसे महत्वपूर्ण विभाग के प्रमुख की इस तानाशाही और 'ओवर-कॉन्फिडेंस' की भनक नहीं है? या फिर जानबूझकर कृषि विभाग को मनमानी की खुली छूट दे दी गई है?
दलालों के हवाले कबीरधाम की किसानी, दो गुने दाम पर बिक रही खाद ।
जमीन पर हकीकत यह है कि किसान सरकारी दफ्तरों और सोसायटियों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। इस कृत्रिम किल्लत का सीधा फायदा दलाल और कालाबाजारी करने वाले उठा रहे हैं। किसानों को मजबूरी में निर्धारित मूल्य से दो गुने दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है। कृषि विभाग की नाक के नीचे चल रहे इस बड़े खेल पर डीडीए की चुप्पी सीधे तौर पर उनकी संलिप्तता या घोर लापरवाही को दर्शाती है।
"जनता के सेवक या आईफोन के पीछे छुपे वीआईपी?"
कबीरधाम प्रशासन की नई परिपाटी बन चुकी है—फोन न उठाना और जनता से दूरी बनाना। महंगे आईफोन लेकर घूमने वाले ये अधिकारी वॉयस मेल का सहारा लेकर अपने कर्तव्यों से भाग रहे हैं। किसानों का साफ कहना है कि ऐसे अहंकारी और संवेदनहीन अधिकारियों के रहने से बेहतर है कि यह पद खाली रहे, ताकि कम से कम सरकार को असलियत तो दिखे।
आज की बैठक: कलेक्टर के लिए कड़ा इम्तिहान
आज की टीएल बैठक कलेक्टर गोपाल वर्मा के लिए एक परीक्षा है। क्या वे हमेशा की तरह कड़े एक्शन के बजाय सिर्फ मीठी बातों में आकर गुमराह होते रहेंगे, या फिर कृषि विभाग के इस गड़बड़झाले पर सीधे डीडीए अमित कुमार से जवाब तलब कर उन पर कड़ी कार्रवाई करेंगे? अगर आज इस कालाबाजारी और अधिकारियों के इस अड़ियल रवैये पर कलेक्टर का हंटर नहीं चला, तो यह साफ हो जाएगा कि कबीरधाम में प्रशासन पूरी तरह से घुटने टेक चुका है।



